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सूरजपुर में पत्रकार हत्या की साजिश: सत्ता – माफिया गठजोड़ का खौफनाक चेहरा बेनकाब “पद की गर्मी, कोर्ट की चौखट पर नहीं चलती तहसीलदार” सहित अन्य आरोपियों पर FIR

तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा :- 

मिथलेश आयम की रिपोर्ट, सूरजपुर(खबरो का राजा) : सूरजपुर जिले में निष्पक्ष पत्रकारिता पर सुनियोजित हमले और सत्ता–भूमाफिया गठजोड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने लोकतंत्र की जड़ों को झकझोर कर रख दिया है। एक निष्पक्ष पत्रकार की हत्या की सुपारी देने के गंभीर आरोपों में लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा सहित कई प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध प्रतापपुर थाना में अपराध दर्ज किया गया है।    यह मामला केवल एक आपराधिक साजिश नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार, भूमाफिया नेटवर्क और सच लिखने वाली आवाज़ों को कुचलने की खतरनाक साजिश का जीवंत उदाहरण है।

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भ्रष्टाचार उजागर करना बना “अपराध” :-                                  हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान के संपादक द्वारा लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के विरुद्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ कई खबरें प्रकाशित की गई थीं। इन खबरों में खुलासा हुआ :- बिना कलेक्टर की अनुमति,  पटवारी प्रतिवेदन,  नियमों को ताक पर रखकर  फर्जी तरीके से जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई।

खबर के बाद SDM सूरजपुर शिवानी जायसवाल द्वारा तहसीलदार को तीन कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि चार महीने बीत जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट आज तक लंबित है।

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भूमाफिया–तहसीलदार गठजोड़ की जड़ें :-                                इस पूरे फर्जीवाड़े का सीधा संबंध लटोरी तहसील के ग्राम हरिपुर निवासी भूमाफिया संजय गुप्ता और उसके पुत्र हरिओम गुप्ता से बताया जा रहा है।     

आरोप है :- तहसीलदार से मिलीभगत कर, गैरकानूनी नामांतरण कराए गए,  और जब पत्रकारों ने रैकेट उजागर किया तो धमकी और हत्या की साजिश रची गई

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पत्रकारों को खुलेआम चेतावनी दिया गया – “तहसीलदार से दूर रहो, वरना अंजाम बुरा होगा।”,

 प्रधानमंत्री आवास और नामांतरण घोटाले की परतें – सिरसी ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में घोटाले की पुष्टि जांच में हुई, जिसके बाद रोजगार सहायक नईम अंसारी को बर्खास्त किया गया।

इसी पंचायत से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया, जहां :- 

देवानंद कुशवाहा की 2 एकड़ जमीन , कथित तौर पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेकर,  उसके भाई बैजनाथ कुशवाहा के नाम,    बैक डेट में नामांतरण कर दी गई,    इस मामले की जांच भी अब तक  में लटकी हुई है।

डेढ़ लाख में पत्रकार की हत्या की सुपारी :- 

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि पत्रकार प्रशांत पाण्डेय की हत्या की साजिश में—                                                                    सुरेंद्र साय पैंकरा (तहसीलदार),,, संजय गुप्ता, हरिओम गुप्ता,,,प्रेमचंद ठाकुर, अविनाश ठाकुर,,,संदीप कुशवाहा,,,तथाकथित पत्रकार फिरोज अंसारी,,,और उसका साला असलम   शामिल थे।

आरोप है कि डेढ़ लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी गई और इसे अंजाम देने के लिए तीन बार प्रयास किए गए।

हत्या के तीन नाकाम प्रयास,,,, पहला प्रयास:- पत्रकार को सिरसी बुलाकर ट्रक से कुचलने की योजना बनाई गई, लेकिन परिवार और छोटे बच्चे को साथ देखकर योजना टाल दी गई।

दूसरा प्रयास:- शूटर असलम को बुलाया गया, लेकिन उसी दौरान पत्रकार परिवार सहित उज्जैन (महाकाल दर्शन) चले गए।

तीसरा प्रयास:-  20 सितंबर की रात बनारस मार्ग पर बाइक से लौटते समय कार से कुचलने की कोशिश की गई, पर भीड़ और यातायात के चलते साजिश नाकाम रही।

ग्रामसभा में फूटा राज :-  हरिपुर ग्रामसभा के दौरान आरोपियों के बीच आपसी विवाद हुआ और पूरी साजिश सार्वजनिक हो गई। भरी पंचायत में,,,  संजय गुप्ता ने धमकी, सुपारी और साजिश स्वीकारते हुए माफी मांगी,,,  जबकि हरिओम गुप्ता ने माफी से इनकार कर “पंचायत के बाहर फैसला” करने की धमकी दी

प्रतापपुर थाना मे इन पर दर्ज हुई FIR  :- 

सुरेंद्र साय पैंकरा (तहसीलदार, लटोरी),,,  संजय गुप्ता,,,, हरिओम गुप्ता,,,, अविनाश ठाकुर,,,, प्रेमचंद ठाकुर,,,  संदीप कुशवाहा,,, तथाकथित पत्रकार फिरोज अंसारी,,,, असलम,,,  पुलिस के अनुसार जांच तेज कर दी गई है और जल्द कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चार महीने से जांच लंबित: लापरवाही या संरक्षण?

सबसे बड़ा सवाल यही है :- गंभीर आरोप,,,  पुख्ता दस्तावेज,,,  और FIR दर्ज होने के बाद भी,,,  SDM स्तर की जांच चार महीने से क्यों लंबित है?

क्या यह महज़ प्रशासनिक लापरवाही है,,,  या फिर भ्रष्ट अधिकारी को संरक्षण? अब इस पूरे मामले में न्याय की आखिरी उम्मीद अदालत ही नजर आ रही है, क्योंकि

“पद की गर्मी, कोर्ट की चौखट पर नहीं चलती।”l

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